न दौलत में, न सूरत में, मोहब्बत तो छिपा है इंसानो की सीरत में !
ये पनपता नहीं किसी की शर्तों में, रुकता नहीं किसी की बंदिशों में !!
~ निराश

न दौलत में, न सूरत में, मोहब्बत तो छिपा है इंसानो की सीरत में !
ये पनपता नहीं किसी की शर्तों में, रुकता नहीं किसी की बंदिशों में !!